Brahma Sarovar

Brahma Sarovar कुरुक्षेत्र हरियाणा के थानेसर में स्थित एक पवित्र जल कुंड है। जिसकी हिन्दू धर्म में बड़ी मान्यता है इसका सम्बन्ध सृष्टि कर्ता ब्रह्मा जी से माना जाता है। ब्रह्मसरोवर के स्थान पर प्रजापति ब्रह्मा जी ने जगत की उत्पत्ति के लिए  सर्वप्रथम यज्ञ किया था। इस सरोवर का सम्बन्ध महाभारत काल में युद्ध से भी माना जाता है की युद्ध के अंतिम निर्णायक दिन में दुर्योधन इसी सरोवर में छिपा था।

सरोवर में प्रत्येक वर्ष नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर की शुरुआत में अन्तर्राष्ट्रीय गीता जयंती समारोह का आयोजन होता है। वर्ष 2019 में यह 23 नवंबर से 10 दिसंबर 2019 तक है । 18 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में देश विदेश से इस पवित्र ग्रंथ “भगवद गीता” के सभी प्रशंसक और प्रेमी इस उत्सव में शामिल होने आते हैं और यज्ञ, गीता पाठ, भजन, आरती, नृत्य, नाटक आदि में भाग लेते हैं। यह वह समय भी होता है जब सरोवर में दूर-दूर से प्रवासी पक्षी आते हैं।

इस सरोवर में सोमवती अमावस्या और सूर्य ग्रहण के समय में स्नान करने से हज़ारो अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। यह प्राचीन सरोवर भारत के मानव निर्मित सरोवरों में सबसे बड़ा है। यह आयताकार आकार में बना हुआ है।

Brahma Sarovar Ghat

ब्रह्मसरोवर में मुख्य 02 प्रवेश द्वार और स्नान घाट बने हुए हैं जो महाभारत के विभिन्न पात्रों के नाम पर हैं। 

श्री कृष्ण घाट 

भीष्म घाट 

कुंती घाट 

युधिष्ठिर घाट

भीम घाट 

अर्जुन घाट 

अभिमन्यु घाट

Sarveshwar Mahadev Mandir

श्री सर्वेश्वर महादेव जी का एक पवित्र मंदिर सरोवर के भीतर है जिसके बारे में कहा जाता है की ब्रह्माजी ने यहॉं शिवजी की पूजा की और यज्ञ किया। मंदिर जाने का रास्ता एक छोटे से पुल से है।

सरोवर के पुल से दो हिस्सों में बटा हुआ है जिसके बीचो बीच में पुरुषोत्तमपुरा बाग है जिसमे एक तरफ कात्यायनी मंदिर और एक बड़े रथ पर कृष्ण और अर्जुन की कांस्य प्रतिमा है। और दूसरी तरफ द्रोपदी कूप जिसे चंद्र कूप भी कहा जाता है और हनुमान जी का मंदिर है। और प्रातः और सायं की महाआरती होती है। सरोवर के अंदुरुनी किनारे पर महाभारत युद्ध से जुड़े हुए विभिन्न चित्र लगे हुए हैं।

What is the history of Brahma Sarovar in Kurushetra?

ऐसा सुना जाता है की इस सरोवर की सर्वप्रथम खुदाई राजा कुरु ने करवाई थी। मध्यकाल में मुस्लिम शासको द्वारा यहां पर सैनिकों के लिए छावनी का निर्माण कराया था जो तीर्थ यात्री यहां स्नान करने के लिए आते थे वे उनसे जज़िया कर वसूलते थे।

1567 ईस्वी में अकबर ने अपनी कुरुक्षेत्र की यात्रा के समय जज़िया कर को समाप्त किया । औरंगज़ेब ने फिर से कर लगा दिया । जिसे अंत में अठारहवीं शताब्दी में मरोठों द्वारा समाप्त कराया गया। इस सरोवर की विशालता को देखते हुए अकबर के दरबारी कवि और लेख़क अबुल फज़ल ने इस सरोवर को “लघु समुंद्र” कहा था। यह सरोवर एशिया के मानव निर्मित सरोवरों में सबसे बड़ा है।

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How to reach Brahma Sarovar

Brahma Sarovar के सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन Thanesar City, Kurukshetra Junction हैं ।

Thanesar (Old) Bus Stand ब्रह्म सरोवर का सबसे नजदीक बस अड्डा है।

निजी वाहन से भी यहाँ पहुंचा जा सकता है।

YouTube Video

इस बार Brahma Sarovar में International Gita Mahotsav में जाने का मुझे भी अवसर मिला जिसे मैंने YouTube Video के रूप में record किया है उसका Link नीचे दिया हुआ है।

आपके सुझावों और प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।

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